अक्षत पर अंकित अभिव्यक्ति "निरू छाबड़ा" की अनूठी कला-साधना : डॉ. सोनिया शर्मा
चावल के सूक्ष्म दानों को बनाया संस्कृति, देशप्रेम और सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति का माध्यम कैनवास बड़ा हो, तभी कला बड़ी हो—यह आवश्यक नहीं। कभी-कभी चावल का एक छोटा-सा दाना भी कलाकार की कल्पना और साधना का विस्तृत संसार समेट सकता है। जयपुर की निरू छाबड़ा ने चावल के दानों पर सूक्ष्म लेखन को अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर इसी विचार को सार्थक किया है। एक दाने पर 108 तक अंग्रेजी अक्षर अंकित करने से लेकर राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, मंत्र, सामाजिक संदेश और राष्ट्रीय महत्व के विषयों को चावल पर उकेरने तक उनकी कला ने एक अलग पहचान बनाई है। 1984 में शुरू हुआ एक अनूठा प्रयोग राजस्थान के जयपुर जिले के बधाल गाँव में जन्मी निरू छाबड़ा को बचपन से ही कला और अत्यंत बारीक लेखन में रुचि थी। उन्होंने महारानी गर्ल्स कॉलेज, जयपुर से बी.कॉम. तथा जयपुर के स्कूल ऑफ आर्ट्स से कला में डिप्लोमा प्राप्त किया। जयपुर के संग्रहालयों में संरक्षित सूक्ष्म कलाकृतियाँ उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती थीं। विवाह के बाद उन्होंने अपनी रुचि को एक नई दिशा देने का निश्चय किया और वर्ष 1984 में चावल के दानों पर सूक्ष्म लेख...