"उद्भव" - युवा चित्रकारों की सृजनात्मक चित्रों की प्रदर्शनी : संदीप सुमहेन्द्र
गुलाबी नगरी में "एब्सरेक्ट विजन" तथा "पैलेट बाय डी-1" के संयुक्त तत्वावधान में "उद्भव" चित्रों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी जयपुर के विश्वप्रसिद्ध पर्यटक स्थल हवा महल में संपन्न हुई।
इस कला प्रदर्शनी का विधिवत उदघाटन कलाविध प्रोफेसर चिन्मय मेहता तथा पद्मश्री एस. शाकिर अली द्वारा 22 फरवरी को किया।
प्रोफेसर चिन्मय मेहता ने अपने संदेश में कहा की कला की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सृजनकारों के साथ-साथ ऐसे समारोहों के क्षमतावान आयोजकों की भी भूमिका अहम होती है। प्लेट बॉय डी-1 का भव्य शुभारंभ करके मुझे बहुत खुशी हो रहीं है। जयपुर शहर में कला दीर्घा और कला प्रदर्शनियां अनेक आयोजित हो रही है, इससे उभरते हुए युवा कलाकारों को काफ़ी प्रोत्साहन मिल रहा है।
इस समारोह में हुई कला-वार्ता भी बहुत रुचि पूर्ण रही जिसमें जागरूक कला प्रेमियों ने कईं सटीक प्रश्न भी हमसे किए। सबसे महत्वपूर्ण चर्चा इस मुद्दे पर हुई कि कलाकृति की महत्ता इस बात आधारित होती है कि चित्रकार अपने चित्र में सुंदर रूपाकार रच कर नया क्या रचा है जो मौलिक हो? यह आयोजन कई मायनों से एक खूबसूरत एवं अविस्मरणीय रहा। मैं इस आयोजन की निष्ठावान कोर टीम के सभी सदस्यों श्री प्रणव चतुर्वेदी, आशीष भावन, सुरजीत सिंह एवं उनके परिवार के सदस्यों को हृदय से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। सभी ने मिलकर संभावनाओं के अनेक रास्ते खोल दिए है। हमें इसी जोश और समर्पण से इस अनोखे और चुनौतीपूर्ण मिशन को ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। कलाओं के बारे में चर्चा करते हुए दोनों ही विख्यात चित्रकारों ने युवा चित्रकारों को प्रेरणा दी तथा उनके सवालों के जवाब देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
प्रदर्शनी के प्रमुख संचालक आशीष भवण व प्रणव चतुर्वेदी ने कहा कि इस प्रदर्शनी में कलाकारों व दर्शकों में भारी मात्रा में उत्साह देखा गया। प्रदर्शनी में जयपुर के अलावा मुबई, गांधी नगर, नोएडा, दिल्ली व ऑस्ट्रेलिया से भी कलाकारों ने भाग लिया। प्रदर्शनी 24 फरवरी को संपन्न हुई।
इस प्रदर्शनी में जयपुर के चित्रकार संत कुमार ने प्रदर्शनी के दौरान लाइव पोर्ट्रेट चित्रण का डेमो भी किया। संत कुमार ने बताया कि इस प्रदर्शनी में विविध शैली और कलात्मक अभिव्यक्तियाँ देखने को मिलीं। जयपुर के ऐतिहासिक हवा महल के वातावरण में सजी शानदार कलाकृतियों की कला प्रेमियों ने बहुत सराहना की। इस प्रदर्शनी के दौरान लाइव पोर्ट्रेट बनाना मेरे लिए विशेष अनुभव रहा। कला प्रेमियों के साथ संवाद करते हुए यह पल यादगार और आनंददायक बन गया। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए यह एक शानदार और प्रेरणादायक अनुभव रहा।
युवा चित्रकार अदिति अग्रवाल जो पक्षियों के पंखों पर अपनी कलाकृतियां बनाने के लिए अपनी एक विशेष पहचान रखती है उन्होंने अपनी चित्र के बारे में बताते हुए कहा कि मैने एक महीने तक सोचते हुए अपने चित्र सृजन में समसामयिक चित्रण किया है। जैसा की सभी जानते है, हवा महल से राजा की सवारी निकलती हुई देखने के लिए रानियों के लिए हवा महल का निर्माण हुआ था। मैने भी अपनी कलाकृति में उसी दृश्य को दर्शाया हैं, जहां 63 लोगों के सवारी हवा महल के सामने से दर्शायी गई है।
चित्रकार मोनिका देवी ने अपने चित्र के बारे में बताया कि मेरे चित्र का शीर्षक "Shashvat - The Eternal within" है, जिसे मैंने मिक्स मीडिया माध्यम से चित्रित किया है। मैं अपने चित्र में यह बताना चाहती थी की "शाश्वत" प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान उस अनंत और मौन चेतना की खोज है, जो रूप, समय और पहचान से परे है। यह कृति भगवान शिव की मूल भावना से प्रेरित है, परन्तु यह केवल एक देव रूप का चित्रण नहीं, बल्कि उस शाश्वत ऊर्जा का प्रतिबिंब है जो हम सभी के भीतर निवास करती है। गहरे नीले रंग ब्रह्मांडीय गहराई और आंतरिक स्थिरता का प्रतीक हैं, जबकि अर्धचंद्र समय के चक्र को दर्शाता है — जो निरंतर बदलता है, फिर भी अनंत रूप से लौटता रहता है। त्रिशूल सृष्टि, संरक्षण और संहार — अस्तित्व को आकार देने वाली तीन शक्तियों — के संतुलन की याद दिलाता है। शांत पृष्ठभूमि के बीच उभरते जीवंत नारंगी रंग जागरण की चिंगारी, मोह के विनाश और परिवर्तन की अग्नि का प्रतीक हैं।
अमूर्त बनावटों और परतदार स्ट्रोक्स के माध्यम से यह चित्र समकालीन और आध्यात्मिक संसार को जोड़ता है — यह संकेत देते हुए कि दिव्यता कहीं दूर या बाहरी नहीं, बल्कि एक गहरा, निजी और आंतरिक अनुभव है। बंद नेत्र दर्शक को भीतर की ओर यात्रा करने, आत्मचिंतन और आत्मबोध की प्रेरणा देते हैं। शाश्वत नश्वरता के भीतर स्थायित्व का ध्यान है — अराजकता और शांति, रूप और अरूप, सीमित और असीम के बीच एक दृश्य संवाद को दर्शाता है।
प्रदर्शनी में ऑस्ट्रेलिया के चित्रकार मुकेश गुरु ने भी छायाचित्र प्रदर्शित किया, अपने सृजन के बारे में मुकेश ने बताया की "स्थिरता में ही परिवर्तन का आरंभ होता है।" उसकी आँखें बंद हैं — अज्ञान में नहीं, बल्कि भीतर की ओर मुड़ने की अवस्था में। बाहरी संसार मौन हो चुका है, विचलनों से मुक्त। फिर भी उसके ऊपर रंगों का एक संसार उमड़ता है — जीवंत, स्पंदित और गतिशील। विचार, स्मृतियाँ, पहचान और भावनाएँ आपस में गुंथकर चेतना का एक ताना-बाना रचती हैं।इन रंगों के मुकुट से एक चाबी नीचे उतरती है — जागरूकता के केंद्र में ठहरी हुई।
Awakening कोई शोर नहीं है, न ही कोई नाटकीय क्षण। यह वह शांत अनुभूति है जब यह एहसास होता है कि चाबी हमेशा से हमारे भीतर ही थी। मेरी यह कृति नींद और आत्मबोध के बीच के उस सूक्ष्म क्षण को खोजती है — जब मन स्वयं की असीमता का द्वार खोलता है, और मौन पड़ा हुआ अस्तित्व अपने ही रंगों को पुनः पहचानने लगता है।
दिल्ली की चित्रकार मोनिका अंग्रिश ने अपने डिजिटल माध्यम से बनाए चित्र के बारे में बताया कि मेरी यह कृति "Pangong Tso" की एक अमूर्त अभिव्यक्ति है, जहाँ बहती रेखाएँ और परतदार रूप जल की शांति और पर्वतों की दृढ़ता को एक साथ समेटते हैं। मुलायम नीले और मिट्टी के रंग सुकून, प्रवाह और प्रकृति के शाश्वत संतुलन का एहसास कराते हैं। यह चित्र झील और धरती के बीच उस अनकहे संवाद को दर्शाता है, जहाँ स्थिरता और गतिशीलता एक-दूसरे में विलीन हो जाती हैं।
"Echoes of Pangong Tso* प्रकृति की उस मौन प्रतिध्वनि को अभिव्यक्त करता है, जो समय के पार भी अपनी गूंज बनाए रखती है — शांत, गहरी और अनंत।
बैंगलोर की चित्रकार हेमंत कुमार ने छायाचित्र प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि यह छवि "Schizaspidia Wasp" के जीवन चक्र की एक अद्भुत और जटिल कहानी को दर्शाती है। यह ततैया अपनी अंडियाँ उन पत्तों या सतहों पर देती है जहाँ चींटियाँ भोजन की खोज में आती-जाती हैं। जब कोई चींटी अनजाने में उस अंडे को उठा लेती है, तो वह उसे अपने घोंसले तक पहुँचा देती है। घोंसले के भीतर अंडे से लार्वा निकलते हैं और वे चींटी के लार्वा से चिपक जाते हैं। ततैया के लार्वा, चींटी के लार्वा से पोषण प्राप्त करते हुए धीरे-धीरे परिपक्व होते हैं। परिपक्व होने पर वे प्यूपा अवस्था में प्रवेश करते हैं और अंततः एक वयस्क ततैया के रूप में विकसित होते हैं।
Jewelled Predator प्रकृति की सूक्ष्म परंतु शक्तिशाली रणनीतियों को उजागर करता है — जहाँ सौंदर्य और शिकारी प्रवृत्ति एक साथ मौजूद हैं, और जीवन चक्र की अनदेखी परतें हमारे सामने एक नई दृष्टि प्रस्तुत करती हैं।
प्रदर्शनी मुख्य प्रतिभागी चित्रकार : चारु कपूर, मोनिका देवी, अंशु पवन, दीप्ति शर्मा, सुरजीत सिंह, अमृता सगदेव, कविता उपाध्याय, मोनिका पारीक, विनीता मिश्रा, इरा मान, रेनू विजय सिंह, डॉ. मनीषा शर्मा, दीपेन जोशी, प्रियंका अग्रवाल, प्रिया बजाज, सोनम पिटी-जयपुर से एवं अदिति अग्रवाल- दिल्ली, मुकेश गुरु-ऑस्ट्रेलिया, मानसी जोशी-जूनागढ़, मोनिका अंग्रिश-दिल्ली, शाइस्ता शाहिद-गांधीनगर, हेमंत कुमार-बैंगलोर, गायत्री वर्मा-मुंबई, पूनम राणा -चंडीगढ़ ने भाग लिया।
मैं कलावृत्त की और से सभी चित्रकारों के उज्वल भविष्य के लिए अपनी और से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ। आप अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति से देश दुनिया में खूब नाम कमाएं और कला जगत में अपने श्रेष्ठ सृजन के लिए जाने जाएं।
संदीप सुमहेन्द्र
चित्रकार एवं कला समीक्षक










Bahut khub rango ki mahfil me sabdo ki mithas sandeep ji
ReplyDeletewah bahut accha hai
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