तेलंगाना आर्ट : डॉ स्नेहलता प्रसाद का राजस्थान विश्वविद्यालय में व्याख्यान

जयपुर।  राजस्थान विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट डिपार्टमेंट में हैदराबाद की कलाकार डॉ स्नेहलता प्रसाद ने तेलंगाना आर्ट पर विस्तृत व्याख्यान दे छात्र-छात्रों को इस कला के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

डॉ स्नेहा ने बताया कि तेलंगाना आर्ट के बारे में राजस्थान के कला छात्रों को अवगत करवाया जाये। तेलंगाना आर्ट का इतिहास 4000 वर्षो पुराना है जिसे हम वर्तमान में पांच भागो में देखते है :- 1. निर्मल पेंटिंग 2. डेक्कन पेंटिंग 3. विजयनगर पेंटिंग 4. चिरियाल पेंटिंग एवं मुगल पेंटिंग। वर्तमान में सिर्फ 8-9 परिवार ही इस कला की परंपरा को आगे बढ़ा रहे है जो कि पूर्ण रूप से प्राक्रतिक रंगों का इस्तेमाल करते है तथा ये सभी रंग वे स्वयं अपने हाथों से बनते है। सर्व प्रथम ग्राउंड के लिए चाक पाउडर मे गोंद, चावल का पानी (मांड) व कई अन्य चीजें मिलाकर उसे तैयार करते है तथा अन्य रंगों में पीला रंग हल्दी से, हरे रंग को एक खास पेड़ के पत्तो से और काले रंग के लिए काजल और कोयले के पाऊडर से बनते है। ज्यादातर लाल, हरा, पीला और कला रंग ही पेंटिंग्स में इस्तेमाल करते है।

1950 में तत्कालीन निजाम के द्वारा इन कलाकारों को प्रोत्साहन दिया गया जिसके कारण ये कला आज भी जीवित है।  इसकी महत्ता को देखते हुए अब तेलंगाना की राज्य सरकार और कुछ सामाजिक संस्थाए भी इस कला को बचाने एवं इसका विकास करने के लिए प्रयास कर रही है। 

विश्विद्यालय के कला संकाय से डॉ तनुजा, डॉ आई. यु. खान, डॉ अनिता, डॉ लोकेश, डॉ रितिका, डॉ जगदीश शर्मा आदि के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राये भी इस व्याख्यान में उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम के अंत मे डॉ आई. यु. खान ने कार्यक्रम में पधारे सभी लोगो एवं छात्रों का आभार जताते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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