लखनऊ के बदलते कला परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका : अखिलेश निगम

अखिलेश निगम
 फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी के पहले "स्थापना दिवस" के उपलक्ष्य में 'अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस' ( मार्च २०२२) पर प्रारंभ "प्रिंटमेकर्स बारह" नामक कला प्रदर्शनी का एक माह बाद गुरुवार ( अप्रैल २०२२) को समापन हो जायेगा। इस चर्चित प्रदर्शनी में देश की बारह महिला छापाकारों के विभिन्न माध्यमों के छापा चित्रों को प्रदर्शित किया गया। लखनऊ में इसे अपने किस्म की अनूठी प्रदर्शनी कहा जा सकता है। वह इस मायने में कि सिर्फ महिला छापाकारों के कामों को लेकर आयोजित यह संभवतः पहली सामूहिक कला प्रदर्शनी रही है। इसमें सिर्फ बारह कलाकारों को लेना साल के बारह महीनों का प्रतीक है।

कोरोना त्रासदी के मध्य विगत वर्ष (२०२१) मार्च से प्रारंभ इस वीथिका का ध्येय था कोरोना त्रासदी से पीड़ित कलाकारों (विशेषत: स्वतंत्र कलाकार) के मनोबल को बनाये रखते हुए उन्हें प्रोत्साहित करना. कोरोना काल की सावधानियों का पालन करते हुए वीथिका ने कई आॅनलाइन कार्यक्रम संपन्न किये, और ये सिर्फ चर्चित ही नहीं हुए बल्कि कलाकारों के लिए हितकारी भी बनेछोटी-सी यह शुरुआत अब रंग लाने लगी है। जाहिर है इसका श्रेय इसकी निदेशिका सुश्री नेहा सिंह को जाता है

यह नेहा की ही परिकल्पना थीउनके इस स्वप्न को साकार करने में क्यूरेटर - कलाकार भूपेंद्र कुमार अस्थाना के साथ ने सोने में सुहागा जैसा असर दिखाया है

यदि लखनऊ के पिछले दशक के कला परिदृश्य पर हम दृष्टि डालें तो शहर की तीन महिलाओं को यहां की कला-चेतना जाग्रत करने का श्रेय दिया जा सकता हैसबसे पहले इनमें डाॅ. वंदना सहगल का नाम आता है। फिर श्रीमती मानसी डिडवानिया, और फिर सुश्री नेहा सिंह का।

वंदना सहगल ने स्वयं तो अब तक किसी वीथिका की स्थापना नहीं की है परंतु उनकी प्रेरणा से होटल लबुआ में " सराका आर्ट गैलरी " वर्ष २०१८ में जरुर स्थापित हुई। इसके सहित अन्य स्थानों पर भी अपने श्रोतों से वे लखनऊ को एक अलग-सा कला माहौल देने में प्रयत्नशील मिलती हैंवे स्थानीय वास्तुकला महाविद्यालय में डीन हैंवहीं चित्र सृजन करना उनकी बड़ी अभिरूचि में शामिल हैंभारतीय कला-संस्कृति से उन्हें गहरा लगाव हैकला उन्नयन के लिए बराबर कोई एक दशक से कलाकार शिविर, वर्कशॉप, एकल सामूहिक कला प्रदर्शनियां आदि वे कराती रही हैं

श्रीमती मानसी डिडवानिया लखनऊ में अलीगंज स्थित "कला स्रोत" कला वीथिका की निदेशिका हैंअपने पति अनुराग जी के साथ वर्ष २०१४ में इस वीथिका की स्थापना उन्होंने की थीतब से अनेक एकल प्रदर्शनियों, सेमिनार आदि सहित कई प्रकाशन भी वीथिका के नाम हैं. कला स्रोत नाम से ही एक हिन्दी त्रैमासिक कला पत्रिका का प्रकाशन भी यहां प्रारंभ हुआ था।

जबकि सुश्री नेहा सिंह लखनऊ के एक नामी शैक्षिक ग्रुप से जुड़ी हैंयुवा हैं, और आधुनिक सोच सहित

भारतीय संस्कृति की पोषक भीउनमें भी आधुनिक लखनऊ को कुछ नया देने की ख्वाहिश हैजिसके परिणाम स्वरूप "फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी" की स्थापना (२०२१) हुईवहीं नेहा का यह संकल्प कि अगले स्थापना दिवस से पहले यह गैलरी एक बड़े और भव्य भवन में होगी...उनकी इच्छा शक्ति की प्रबलता को दर्शाती है।

लखनऊ के कला - जगत के लिए यह एक शुभ संकेत है क्योंकि इन तीनों महिलाओं की सोच सरकारी संस्थानों से थोड़ा अलग हट कर है।

© अखिलेश निगम

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