जीवन के अस्तित्व को ऑर्गेनिक फॉर्म्स द्वारा रेखांकित किया चित्रकार पल्लवी पंडित ने : संदीप सुमहेन्द्र

 संकल्पना - जीवन की शुरुआत
, चित्रकार पल्लवी पंडित की एकल प्रदर्शनी मंगलवार, 1 अगस्त को कला दलन, चौथी मंजिल, विदर्भ साहित्य संघ, सीताबर्डी में आरंभ हुई। वी.एस.एस. अध्यक्ष मनोहर म्हैसालकर ने प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन किया, साथ में वनराज ट्रस्टी गिरीश गांधी, विशिष्ठ अतिथि के रूप में श्री दीपक जोशी, पूर्व विभागाध्यक्ष, चित्रकला विभाग, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विश्वविद्यालय, नागपुर और कलाकार, कला विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पल्लवी सिम्बायोसिस, नागपुर कैंपस में विजिटिंग लेक्चरर हैं और उन्होंने मास्टर्स ऑफ फाइन आर्ट्स, एम.एफ.ए (पेंटिंग) विधा से किया है जिसमें उन्होंने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक जीता है। पल्लवी पंडित को वर्ष 2014-16 में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा फेलोशिप (विषय : आधुनिक भारतीय चित्रकला के प्रणेता: रवींद्र नाथ टैगोर, जैमिनी राय, अमृता शेरगिल, जॉर्ज कीट) से भी सम्मानित किया गया है। सी शिवराममूर्ति द्वारा लिखित "भारतीय चित्रकला" किताब का मराठी भाषा में अनुवाद भी किया है इसे एन.बी.टी द्वारा वर्ष 2020 में प्रकाशित किया गया।

इस प्रदर्शनी के बारे में बात करते हुए पल्लवी ने बताया कि "मूल रूप से मैं 'द लाइफ' के कॉन्सेप्ट पर काम करती हूं। जब मैंने इस विषय पर अपनी पेंटिंग शुरू की थी, तो विचार एकदम स्पष्ट था मेरा की हर किसी को अपने जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। एक चरण ऐसा आता है जहां सब कुछ गलत हो जाता है; एक बाधा ऐसी होती है जिससे सब कुछ उल्टा-सीधा हो जाता है।

लेकिन इस स्थिति में मुझे लगता है कि प्रकृति एक वास्तविक 'गुरु' साबित हो सकती है। यह हमें सकारात्मक होने और यह विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है कि 'यह भी बीत जाएगा।' हमारे आस-पास के परिवेश में हम देख सकते हैं कि बहुत ही गंभीर और प्रतिकूल परिस्थितियों
में भी, एक छोटा बीज एक पौधे के रूप में अंकुरित हो खिलता है और एक पेड़ बन जाता है। और हम इंसानों को विशेष योग्यताओं का उपहार दिया जाता है, इसलिए निश्चित रूप से उन क्षमताओं और सकारात्मकता के साथ हम उस छोटे से बीज की तरह ही दूर हो सकते हैं और खिल सकते हैं। अब मैं एक ही विषय पर अलग-अलग दृष्टिकोण के साथ काम कर रही हूं - 'कॉन्सेप्शन: द बिगिनिंग ऑफ लाइफ'। मुझे "सृष्टि" की अवधारणा - जीवन की रचना बहुत आकर्षक लगती है और यह प्रकृति है जिसे मैं इस विषय को प्रस्तुत करने के लिए एक रूपक के रूप में उपयोग करती हूं। मेरी कला अभिव्यक्ति का अभ्यास जिसमें मैं अपनी कला में कल्पना, संदर्भ, निर्माण और प्रस्तुत करने का प्रयास करती हूं। मुझे लगता है कि जीवन, शब्द के सही अर्थों में, एक रसायन शास्त्र से अधिक है जो एक स्वायत्त, स्व-विनियमन और आत्म-प्रजनन प्रणाली के लिए एक विशिष्ट तरीके से रास्ता देती है। जीवन एक जीवित प्राणी के साथ जुड़ा हुआ है, और यह अपने स्वयं के रूपों, प्रवाह, प्रणाली को एक अविभाज्य, संपूर्ण के रूप में बनाता है जो इसके व्यक्तित्व का निर्माण करती है।"

पल्लवी से मेरी मुलाकात वर्चुवल रूप से फोन पर हुई थी। कलावृत्त संस्था द्वारा आयोजित 8 दिवसीय समसामयिक लघु चित्रण शिविर के दौरान तब इन्होंने भी उस शिविर में भाग लिया और बहुत सुंदर चित्र बनाया था।

यह प्रदर्शनी कलाकारों, कला प्रेमियों, विद्यार्थियों के अवलोकनार्थ 6 अगस्त तक जारी रहेगी।


Comments

  1. इस प्रकार के व्यक्तित्व को जानने के बाद एक प्रेरणा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है l प्रदर्शनी के शुभारंभ के लिए चित्रकार को बहुत - बहुत बधाई l

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    1. आभार एवं धन्यवाद आपका डॉ. रेणु जी 🙏

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  2. पल्लवी को कला क्षेत्र में एक नया आसमान मिले। बधाई।

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