कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से सेलिब्रेट किया वैलेंटाइन सप्ताह : संदीप सुमहेन्द्र

आगंतुक आर्ट ट्यून व 
विनीता आर्ट्स 
द्वारा अनूठे 
कला शिविर 
का 
आयोजन
 
जयपुर में आगंतुक आर्ट ट्यून व विनीता आर्टस द्वारा दो दिवसीय वैलेंटाइन वीक का अनूठा आयोजन किया, जिसमें वैलेंटाइन वीक कों अलग अंदाज में मनाया गया, गुलाबी नगरी में ऐसा आयोजन संभवत पहली बार किया गया है, जिसमें शहर के कपल पेंटिंग आर्टिस्ट ने "कमल तलाई कैफे" में लाइव पेंटिंग बना अपनी सृजनात्मकता को चित्रित किया, सभी चित्रकारों ने वैलेंटाइन वीक कों ध्यान में रखते हुवे इस कला शिविर में अपनी सृजनात्मकता द्वारा रंगों और कुंची से प्रेम का संदेश देने का प्रयास किया।

आगंतुक आर्ट ट्यून से अरिजीत मुख़र्जी ने बताया कि इस अनूठे कला शिविर में स्वप्निल टांक-अभिलाषा भारतीय, मोनिका देवी-सुरजीत सिंह, अरिजीत सरदार-मधु सैनी, पूजा भार्गव-प्रशांत भार्गव, शिवलाल-सुनीता राव, दुर्गेश अटल, पूजा पूरी इस कला शिविर के प्रमुख कलाकार थे।

अगले दिन सभी कलाकृतियों कों कमल तलाई कैफे में प्रदर्शित किया गया, इस प्रदर्शनी का उद्घाटन श्री पंकज ओझा (सीनियर आर.ए.एस ) श्री बी.के. दत्ता (कला महोत्सव के संस्थापक) एवं सुहास दत्ता (विभागाध्यक्ष, वुमन पॉलिटकनीक कॉलेज) ने वैलेंटाइन केक काट कर के किया।

इसी के साथ एक कला चर्चा का आयोजन किया गया जिसमें कला की जीवंतता कों किस तरह बरकरार रखा जाये और इसमें और क्या क्या परिवर्तन किये जाये जिससे कलाकारों की आजीविका कों बढ़ावा मिल सकें जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा भी हुई। कलाकारों के प्रश्नों को जवाब देते हुए मुख्य अतिथि श्री पंकज ओझा ने केन्द्र एवं सरकार द्वारा हर विधा के कलाकारों के लिए बनाई योजनाओं से सभी को अवगत करवाया और साथ ही आने वाले समय में भी इन योजनाओं के द्वारा कला एवं कलाकारों के विकास के लिए आश्वस्त किया। 

वरिष्ठ चित्रकार हरिशंकर बालोटिया जी ने भी "ॐ" की कलात्मक छवि के साथ गायत्री मंत्र को चित्रित एवं लेखन द्वारा कैनवास पर बनाया।

कला प्रेमियों के लिए इस शिविर ने सृजित चित्रों की प्रदर्शनी कमल तलाई कैफे एंड गैलरी में 20 फरवरी तक जारी रहेगी।

संदीप सुमहेन्द्र

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

HARSHNATH : The height of excellence

भारतीय चित्रकला में गुरु-शिष्य परम्परा का विशेष महत्व : डॉ रेणु शाही

कलाविद रामगोपाल विजयवर्गीय - जीवन की परिभाषा है कला : डॉ. सुमहेन्द्र