66 महिलाओं ने चित्रों में सार्थक अभिव्यक्ति का चित्रण दर्शाया : संदीप सुमहेन्द्र

विनीता आर्ट्स
महिला कला आभा-8वां संस्करण
66 महिला चित्रकारों के चित्रों की प्रदर्शनी
जयपुर के विश्वप्रसिद्ध पर्यटक स्थल हवा महल में विनीता आर्ट्स एवं पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महिला कला आभा का 8वां संस्करण में आयोजित चार दिवसीय कला प्रदर्शनी का सार्थक आयोजन हुआ।

प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ श्री नरेन्द्र वर्मा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (जयपुर-ई) ने दीप प्रज्वलित कर किया तथा प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए सभी चित्रकारों से उनकी अभिव्यक्ति की बारीकियों को जाना तथा उनकी रचनात्मकता और कला कौशल की प्रशंसा की।

कुछ समय बाद मेरी विनीता आर्ट्स की प्रबंधक विनीता जी से पुनः बात हुई तो पता चला कि 60 महिला चित्रकारों की प्रदर्शनी है जिसमें किसी किसी चित्रकार की एक से ज्यादा पेंटिंग्स भी थी तो प्रदर्शनी में लगभग 100 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई थी। अगले दिन 6 चित्रकार और जुड़ी और चित्रकारों की संख्या 66 हो गई।

मुझे भी इस प्रदर्शनी को देखने का अवसर मिला, तो जैसे ही मैं प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचा तो  चित्रकार रेखा अग्रवाल ने कहा कि मैं आपका लाइव पोर्ट्रेट बनाना चाहती हूं।

यह मेरे लिए थोड़ा अप्रत्याशित भी था लेकिन शायद मेरे राजस्थानी पहनावे और पगड़ी के कारण रेखा ने मेरा लाइव पोर्ट्रेट बनाने का निर्णय लिया होगा। खैर मैं वही सोफे पर बैठ गया और रेखा जी ने लगभग 30- 35 मिनट में ही चारकोल से मेरा पोर्ट्रेट तैयार कर दिया। जिसमें मेरे चेहरे के भाव को गहराई से आंकलन कर चित्रित किया। बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद रेखा जी को इस विशेष विधा में निपुणता के साथ मेरा चित्र बनाने के लिए।

इसी क्रम में अगले दिन कुबेर सिंह नरूका और फिर दुर्गेश अटल ने भी लाइव पोर्ट्रेट का डेमो दिया और युवा चित्रकारों को पोर्ट्रेट बनाने की बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया। इन तीनों चित्रकारों के लाइव पोर्ट्रेट के प्रदर्शन से उपस्थित चित्रकारों, कला प्रेमियों के साथ साथ हवा महल देखने आए पर्यटकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।

चित्रकारों से उनकी अभिव्यक्ति, रंगों, माध्यमों और चित्रण विषयों को जानने की उत्सुकता में एक-एक कर मेरी लगभग सभी चित्रकारों से बात हुई।

युवा चित्रकार महक बुड़िया से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मुझे ग्रामीण क्षेत्र, ऐतिहासिक कहानियाँ/बर वस्तुएँ में चित्रण करना अधिक पसंद है। महक अभी राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट में अपना अध्ययन कर रही है। महक के चित्र का शीर्षक "बोधिसत्व पद्मपाणी" है जो भारत की ऐतिहासिक मूर्तियों में श्रेष्ठ सृजन है। इस शिल्प को देखकर मैंने मेरे मन के भावों के अनुसार चित्रित कर यह भाव दर्शाने का प्रयास किया है मानों इस शिल्प में आत्मा का वास हो। इस कला में कमल के अन्दर गौतम बुद्ध "बुद्धा" को सजीव सृजित करने का प्रयास किया है जो निर्वाण आसन में हैं।

उदयपुर की चित्रकार प्रज्ञा गर्ग के चित्र का शीर्षक "अविनाशी काशी" है। इनके चित्र में अनंत की झलक दिखती है। दशाश्वमेध घाट पर संध्या का समय अत्यंत शांत और पवित्र होता है और आकाश का केसरिया रंग गंगा की लहरों में घुलता सा प्रतीत होता हैं। दीपों की रोशनी पूरे घाट को उजाले और श्रद्धा से भर देती है।

घाट की सीढ़ियाँ काशी के पुराने इतिहास की याद दिलाती हैं। हर रंग और हर रेखा में विश्वास और भक्ति का भाव छिपा है। जिसे देखकर लगता है मानो भगवान शिव की उपस्थिति मेरे चित्र में समाई हो। यह केवल दृश्य नहीं, मेरे मनो - भावों को चित्र द्वारा प्रदर्शित करने का माध्यम है जिस प्रकार काशी की आत्म अविनाशी है यह उसकी की सुंदर अभिव्यक्ति है।

चित्रकार रेनू दिवान ने अपना चित्र चारकोल माध्यम में बनाया जिसका शीर्षक "मॉर्निंग स्ट्रेंथ" है, अपने चित्र के बारे में उनका कहना था कि मैंने इस भावना को ध्यान में रखकर बनाया है कि अंधकारमय रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, उसके बाद आशा और शक्ति से भरी स्वर्णिम सुबह अवश्य आती है। काले अश्व का स्वरूप मैंने मौन शक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। चित्र में उभरती स्वर्णिम प्रभात-आभा उस क्षण को दर्शाती है, जब निराशा के बीच आशा की पहली किरण दिखाई देती है। चारकोल माध्यम की गहराई और बनावट से मैंने संघर्ष, सहनशीलता और भीतर से जागती हुई शक्ति को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।

चित्रकार नव्या माथुर ने अपने सृजन के बारे में बताया कि शांत चमक, एक अकेली बिना चेहरे वाली आकृति ज़मीन और आसमान के बीच खड़ी है, जो शांत मन से सोच में डूबी हुई है। चमकते हुए गोले और प्रभामंडल अंदर की रोशनी का संकेत देते हैं, जबकि ऑर्गेनिक आकार प्रकृति की शांत मौजूदगी को दर्शाते हैं। मेरी पेंटिंग यह संदेश देती है कि शांति, जागरूकता और खुद और ब्रह्मांड के बीच अनदेखे अनकहे भावों को समझने के लिए प्रेरित करती है।


चित्रकार पूजा भार्गव ने अपने चित्र के बारे में कहा कि मेरे चित्र में "दिव्य ध्वनियाँ" जो इंसान की आत्मा को दिव्य चेतना से जोड़ती हैं। इन ध्वनियाँ कानों से बल्कि मन की चेतना से इन्हें महसूस किया जाता है, जिससे शांति, भक्ति और आध्यात्मिक जागृति का एहसास होता है। ये ध्वनियाँ मन को शांत करती हैं और नकारात्मकता को दूर करके एक पवित्र माहौल बनाती हैं। ये ध्यान और प्रार्थना में मदद करती हैं, और आंतरिक ऊर्जा कंपन को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करें।

चित्रकार वर्षा तनेजा के चित्र में रंगों, इतिहास और शांत भव्यता से मोहित। वर्षा ने बताया कि मैंने अपने चित्र में समोद पैलेस की स्थापत्य कला सुकून भरे नीले रंगों और उसके भीतर झलकती स्वर्णिम आभा से मुझे प्रेरित करती है। मेरे उद्देश्य सिर्फ चित्र बना ही नहीं है, बल्कि इतिहास की दीवारों को सुनना है जिन्होंने समय, मौन और अनगिनत कहानियों को देखा है।

चित्रकार अंजली जैन ने अपने चित्र के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा चित्रण गुजरात के कच्छ की पारंपरिक लिप्पन कला से प्रेरित है मैने बाघ का चित्र बनाया है जो प्रकृति की ऊर्जा और संतुलन का प्रतीक है। उभरी हुई बनावट, चमकदार बिंदु और सजीव रंग संयोजन मेरे चित्र को और अधिक जीवंत रूप देते हैं। यह कलाकृति लोगों को बाघ के संरक्षण के साथ साथ सभी वन्य जीवों के जीवन एवं प्रकृति को संरक्षित करने के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है।

चित्रकार वन्दना वर्मा ने भारतीय वास्तुकला संस्कृति चित्रण किया जिसमें उन्होंने एक महल के झरोखे को प्रकृति के साथ चित्रित किया है। वन्दना ने अपने चित्र द्वारा यह संदेश देने का प्रयास किया है कि घर हो या महल शुद्ध हवा जो जीवन का मुख्य आधार है उसकी जरूरत के लिए पेड़ पौधे जरूर लगाने चाहिए स्वस्थ जीवन के लिए। पारंपरिक भारतीय वास्तुकला हर दृष्टि से श्रेष्ठ है। जिसे बहुत ही सुन्दर और आकर्षक रूप से मोर की उपस्थिति भी चित्र की सुंदरता और पक्षियों की महत्ता को चित्रित किया गया है।

वन्दना ने बताया कि मैने अपनी भारतीय वास्तुकला संस्कृति को दर्शाया है, जो बहुत खूबसूरत तो है ही साथ में हवा का आगमन किस तरह हर समय होना चाहिए इसका भी विशेष ध्यान रखा जाता था। घूमेरदार झरोखे बड़ी कुशलता से बनाएं जाते थे जो अब कही देखने को नहीं मिलते। मैं अब पुनः अपनी भारतीय वास्तुकला संस्कृति को फिर से अपने आंगनो में देखना चाहती हूँ।

जयपुर की चित्रकार गीतांजलि कोठारी ने घरों में मोर के महत्व को दर्शाने का प्रयास किया है उनका मानना है कि सौभाग्य के लिए मोर को घर में लाना बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन मोर को घर में नहीं पाल सकते इसलिए चित्र या मूर्ति के रूप में उसे अपने घर में जरूर रखना चाहिए। भगवान श्रीकृष्णजी के मुकुट का श्रृंगार भी मोर पंख से होता है, जो उनकी दिव्यता और सुंदरता में चार चांद लगा देता है यह मोरेपंख।

चित्रकार अंजनी शर्मा ने भी अपने सृजनात्मक चित्रों को प्रदर्शित किया है, मैंने मूर्तिकला कला पेंटिंग बनाई है विशेष रूप से अभी क्रिसमस का अवसर है तो उसको ध्यान में रखते हुए क्रिसमस थीम पर एक बर्ड बनाई, जिसने सांता की कैप लगाई है। खुशी की बात ये है कि इस प्रदर्शनी में मेरी क्रिसमस थीम वाली पेंटिंग सेल भी हो गई। चित्रकार के लिए उनके चित्रों का सेल हो जाना भी आवश्यक है, एक कलाकार को या क्या चाहिए, यह मेरी पहली प्रदर्शनी है। मुझे यह अवसर देने के लिए मैं विनिता मैम को बहुत बहुत धन्यवाद देती हूं।

चित्रकार दीप्ति शर्मा ने अपना चित्र दिखाते हुए बताया कि मैने इस प्रदर्शनी में अपनी दो पेंटिंग्स प्रदर्शित की है, जिसमें एक सफेद घोड़े के सिर का चित्रण किया है। अपनी पेंटिंग्स जिसमें मैने प्रेरणा, शक्ति और सकारात्मक भावनाओं को जगाने का प्रयास किया है। सफेद रंग स्वयं पवित्रता, शक्ति, मानसिक शांति और स्पष्ट सोच की भावना जगाता है।

दूसरे भाग में कुछ और चित्रकारों के चित्रण बारे में बताऊंगा।

धन्यवाद
संदीप सुमहेन्द्र

Comments

  1. Bahut sundar warnan artists ke paintings ke...👏👏👌🙏

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  2. Thank you so much Sundip sir, aapne shabdon ke madhyam se jo sabhi kalakaron ke liye inta sundar lekh likha hai uske liye bahut dhanyawad.

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  3. “संदीप सर, आपने सभी कलाकारों के लिए जो इतना सुंदर, संवेदनशील और प्रेरणादायक लेख लिखा है, उसके लिए हृदय से धन्यवाद। यह हम सभी कलाकारों के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है कि आप हमारे लिए लिख रहे हैं। सभी को इतना स्नेह, पहचान और अपना बहुमूल्य समय देने के लिए हम आपके आभारी हैं।”

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