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"अंतर्द्वंद" अनकही अभिव्यक्ति का सार्थक सृजनकार : संदीप सुमहेन्द्र

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युवा चित्रकार “आदि प्रिया” के चित्रों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी ‘अंतर्द्वंद’ का 13 मार्च को जवाहर कला केन्द्र की सुकृति कला दीर्घा में आरम्भ हुई।  प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन उदयपुर के वरिष्ठ चित्रकार कलाविद श्री शैल चोयल एवं कोलकता की वरिष्ठ चित्रकार केतकी रॉय चौधरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर जयपुर कला जगत के वरिष्ठ, युवा चित्रकारों एवं कला विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में कला प्रेमी भी उपस्थित रहे। राजस्थान दिवस पर आयोजित प्रदर्शनियों के अवलोकन के लिए पधारे राज्य के मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवासन  ने भी प्रदर्शित चित्रों को देखा और चित्रों की प्रशंसा भी की। ‘अंतर्द्वंद’ शब्द में ही मानस में एक विशेष नकारात्मक विचार जन्म लेते है कि "अंतर्द्वंद्व किस बात के लिए ??" यक़ीनन मानव मन के भीतर चलने वाले भावनात्मक संघर्ष और विचारों की जटिलताओं के बारे में अलग-अलग विचारों में सोच दौड़ने लगती है इसकी गति का कोई मापक मानदंड नहीं हो सकता है। यह व्यक्ति-व्यक्ति की वैचारिक दृष्टि एवं क्षमता पर निर्भर होती है। “आदि प्रिया” द्वारा सृजित कला कृतियाँ मनुष्य के आंतरिक अनुभवों, भावनाओं और ...

महिला चित्रकारों की सृजनात्मक चित्राभिव्यक्ति - द्वितीय भाग: संदीप सुमहेन्द्र

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महिला दिवस के अवसर पर जवाहर कला केन्द्र द्वारा "वसुधा" महिला चित्रकार शिविर 8 मार्च से अलंकार कला दीर्घा में शुभारंभ हो 13 मार्च को संपन्न हुआ।  इस शिविर में सभी आमंत्रित  महिला चित्रकारों ने अपना चित्रण कार्य पूर्ण किया जिसकी प्रदर्शनी भी सुदर्शन कला दीर्घा में कला प्रेमियों के अवलोकनार्थ लगाई गई। जिसका उद्घाटन जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक, अनुराधा गोगिया द्वारा किया गया। इस अवसर पर रचनात्मक संवाद करते हुए शिविर को महिलाओं के सशक्तिकरण को समर्पित किया गया है। यह प्रदर्शनी 29 मार्च तक कलाप्रेमियों के अवलोकनार्थ प्रातः 11 से सायं 6 बजे तक खुली रहेगी। इस कला शिविर को निखत अंसारी क्यूरेटर किया है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों से दस महिला कलाकार भाग ले रही हैं, जो कला की तीन पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। वरिष्ठ और प्रख्यात चित्रकारों में  सुरजीत कौर चोयल, मीनाक्षी कासलीवाल भारती और केतकी रॉय चौधरी। मध्य पीढ़ी की चित्रकारों में: शकुंतला महावर, नीलू कांवरिया, हेमल कांकरवाल और करुणा सिंह राजपूत है, तथा युवा उभरती चित्रकारों में  हैं: डिम्पल दलाल, एकता शर्मा और ...

महिला चित्रकारों की सृजनात्मक चित्र अभिव्यक्ति का सृजन : संदीप सुमहेन्द्र

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महिला दिवस के अवसर पर जवाहर कला केन्द्र द्वारा "वसुधा" महिला चित्रकार शिविर 8 मार्च से अलंकार कला दीर्घा में शुभारंभ हुआ। इस शिविर में सभी आमंत्रित चित्रकार महिलाएं प्रातः 10 से सांय 5 बजे अपना चित्रण कार्य करेंगी तथा इस अवसर पर रचनात्मक संवाद और महिलाओं के सशक्तिकरण को समर्पित किया गया है। शिविर का उद्घाटन जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक, अनुराधा गोगिया, द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में जयपुर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर के साथ कई वरिष्ठ, युवा एवं विद्यार्थी चित्रकारों के साथ कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। जिनमें शैल चोयल, अंकित पटेल, हेमंत द्विवेदी, अशोक आत्रे, महावीर भारती, सुनीत घड़ियाल, हरशिव शर्मा, डॉ. चंद्रशेखर सैन और अमित हरित ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस कला शिविर को निखत अंसारी क्यूरेटर कर रही है, जो स्वयं भी समकालीन कला की प्रमुख क्यूरेटर हैं। इन्होंने अनेक कला प्रदर्शनियों, आर्ट कैंप, कार्यशालाओं और कला वार्ताओं का सफल आयोजन किया है। “वसुधा” के माध्यम से उनका उद्देश्य महिला कलाकारों के लिए ऐसा मंच तैयार करना है, ज...

"उद्भव" - युवा चित्रकारों की सृजनात्मक चित्रों की प्रदर्शनी : संदीप सुमहेन्द्र

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गुलाबी नगरी में "एब्सरेक्ट विजन" तथा "पैलेट बाय डी-1" के संयुक्त तत्वावधान में "उद्भव" चित्रों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी जयपुर के विश्वप्रसिद्ध पर्यटक स्थल हवा महल में संपन्न हुई। इस कला प्रदर्शनी का विधिवत उदघाटन कलाविध प्रोफेसर चिन्मय मेहता तथा पद्मश्री एस. शाकिर अली द्वारा 22 फरवरी को किया। प्रोफेसर चिन्मय मेहता ने अपने संदेश में कहा की कला की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सृजनकारों के साथ-साथ ऐसे समारोहों के क्षमतावान आयोजकों की भी भूमिका अहम होती है। प्लेट बॉय डी-1 का भव्य शुभारंभ करके मुझे बहुत खुशी हो रहीं है। जयपुर शहर में कला दीर्घा और कला प्रदर्शनियां अनेक आयोजित हो रही है, इससे उभरते हुए युवा कलाकारों को काफ़ी प्रोत्साहन मिल रहा है। इस समारोह में हुई कला-वार्ता भी बहुत रुचि पूर्ण रही जिसमें जागरूक कला प्रेमियों ने कईं सटीक प्रश्न भी हमसे किए। सबसे महत्वपूर्ण चर्चा इस मुद्दे पर हुई कि कलाकृति की महत्ता इस बात आधारित होती है कि चित्रकार अपने चित्र में सुंदर रूपाकार रच कर नया क्या रचा है जो मौलिक हो? यह आयोजन कई मायनों से एक खूबसूरत एवं अविस्मरणीय रह...