बिंदु से ब्रह्मांड तक: तंत्र संवाद ' में श्री यंत्र, शिव - शक्ति और अमूर्त कला का अनूठा संगम
जयपुर| भारतीय तांत्रिक परंपरा, पवित्र ज्यामिति और आध्यात्मिक प्रतीकों की समकालीन दृश्य अभिव्यक्ति बनी आकर्षण का केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और समकालीन अमूर्त कला के बीच रचनात्मक संवाद स्थापित करने वाली चित्रकला प्रदर्शनी ‘तंत्र संवाद : सनातन चेतना, अमूर्त विस्तार’ का शुक्रवार को जवाहर कला केंद्र, जयपुर की सुदर्शन आर्ट गैलरी में शुभारंभ हुआ।
प्रदर्शनी में श्री यंत्र, शिवलिंग, शक्ति के विविध रूपकों, बिंदु, त्रिकोण, मंडल और पवित्र ज्यामिति से प्रेरित कलाकृतियों के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक चिंतन के दृश्य एवं सौंदर्यशास्त्रीय आयामों को प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी 16 से 18 अक्टूबर 2026 तक कला-प्रेमियों और दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय शीतल जोशी, राजस्थान प्रांत संगठक एवं जीवनव्रती, विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। समारोह में कला, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की।
विशिष्ट अतिथियों में डॉ. रेणुका राठौड़, डॉ. अमिता राज गोयल, डॉ. उज्ज्वला एम. तिवारी, डॉ. काजल ठाकुरिया, वास्तुकार अनु सोगानी, एडवोकेट शिखा शर्मा, सुश्री स्वाति वशिष्ठ, प्रियदर्शिनी राजोरिया, डॉ. रीना मेहता और डॉ. रैना मेहता शामिल रहीं। इनके अतिरिक्त जयपुर के अनेक गणमान्य नागरिकों तथा कला-संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय आयोजकों, संयोजकों और संस्कृतिकर्मियों ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की। इनमें डॉ. चंद्रदीप हाड़ा, कलावृत्त संस्था के संदीप सुमहेन्द्र, विनीता, अशोक आत्रेय, विनय त्रिवेदी, शंकर सिंह राजावत के साथ साथ बड़ी संख्या में कला विद्यार्थियों सहित अन्य कला-संस्कृति से जुड़े गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
तंत्र कला के प्रतीकों में चेतना और सृजन का विमर्श ‘तंत्र संवाद’ का केंद्रीय विचार भारतीय तांत्रिक परंपरा में निहित उन प्रतीकों और ज्यामितीय संरचनाओं से जुड़ा है, जिनके माध्यम से सृष्टि, ऊर्जा, चेतना और अस्तित्व के गहन प्रश्नों को अभिव्यक्त किया जाता रहा है। प्रदर्शनी में प्रस्तुत कलाकृतियाँ इन पारंपरिक प्रतीकों को समकालीन अमूर्त कला की भाषा में पुनर्परिभाषित करने का प्रयास करती हैं। श्री यंत्र की बहुस्तरीय ज्यामिति, परस्पर अंतर्गुम्फित त्रिकोण, केंद्रीय बिंदु और वृत्ताकार संरचनाएँ इन रचनाओं में विशेष महत्त्व रखती हैं।
श्री यंत्र की संरचना में ऊर्ध्वमुखी और अधोमुखी त्रिकोणों का पारस्परिक संयोजन शिव–शक्ति के संबंध, सृजनात्मक ऊर्जा और चेतना के दार्शनिक आयामों की ओर संकेत करता है। बिंदु से विस्तार और केंद्र से परिधि की ओर बढ़ती दृश्य संरचनाएँ एकत्व तथा विविधता के संबंधों पर विचार करने का अवसर प्रदान करती हैं। तिशीलता को व्यक्त करता है। यहाँ ज्यामिति केवल सजावटी विन्यास नहीं, बल्कि सूक्ष्म आध्यात्मिक अवधारणाओं को दृश्य रूप देने वाली भाषा बन जाती है। आदि शंकराचार्य की सौंदर्यलहरी में व्यक्त शक्ति की महिमा, प्रतीकात्मकता और सौंदर्यबोध इस विमर्श को एक महत्त्वपूर्ण दार्शनिक संदर्भ प्रदान करते हैं। भारतीय कला परंपरा में रूप, प्रतीक और आध्यात्मिक अनुभव का संबंध सदैव विचार का विषय रहा है। प्रदर्शनी में अमित कल्ला, नंदिनी खंडेलवाल, गरिमा विश्नोई और तीर्थराज सोनी की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। चारों कलाकारों की रचनात्मक दृष्टियाँ भारतीय प्रतीक-परंपरा और अमूर्त अभिव्यक्ति के विविध आयामों को सामने लाती हैं। रंग, रेखा, आकार, बिंदु, ज्यामितीय संरचना और रिक्त स्थान के संयोजन से निर्मित दृश्य संसार दर्शक को केवल बाहरी रूप देखने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उनके अंतर्निहित अर्थों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। प्रदर्शनी में परंपरागत प्रतीकों का उपयोग किसी एक निश्चित अर्थ को स्थापित करने के बजाय दर्शक के लिए चिंतन और अनुभव की संभावनाएँ खोलता है।
श्री यंत्र की संरचनात्मक जटिलता, शिवलिंग का प्रतीकात्मक विस्तार और शक्ति के विविध ज्यामितीय रूपक इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा समकालीन कलाकार के लिए आज भी एक सक्रिय रचनात्मक स्रोत है। कला और संस्कृति के लिए संवाद का मंच उद्घाटन समारोह में उपस्थित अतिथियों और कला-प्रेमियों ने प्रदर्शनी की कलाकृतियों का अवलोकन किया। आयोजन ने कलाकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, सांस्कृतिक आयोजकों और दर्शकों को भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समकालीन कला के संबंधों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच देने, कला-शिक्षा और शोध को प्रोत्साहित करने तथा सांस्कृतिक सहभागिता के नए अवसर विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जयपुर की समृद्ध कला-सांस्कृतिक पहचान के संदर्भ में भी यह प्रदर्शनी परंपरा और आधुनिकता के बीच सार्थक संबंध स्थापित करने का प्रयास है। कार्यक्रम का संचालन विक्रांत सिंह चौहान ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जीतेंद्र शर्मा ने प्रस्तुत किया।
जवाहर कला केंद्र की सुदर्शन आर्ट गैलरी में आयोजित ‘तंत्र संवाद’ 18 अक्टूबर तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। यह प्रदर्शनी भारतीय तांत्रिक परंपरा के प्रतीकों, ज्यामिति और आध्यात्मिक चिंतन को समकालीन अमूर्त कला के माध्यम से देखने का अवसर प्रदान करती है। बिंदु से विस्तार, रूप से निराकार और दृश्य से अदृश्य की ओर बढ़ता इसका कलात्मक विमर्श दर्शकों को कला के साथ-साथ भारतीय दर्शन की अंतर्धारा से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है।
दिगंत शर्मा






भारतीय कला प्रति आप सभी गुरुजनों का योगदान और इस कला परंपरा को आगे बढाने वाले, दुनियाभर प्रसार करने वाले सभी कलाकारो को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाये 🎉💐 शिल्पकार -रामदास कांबळे, पुणे महाराष्ट्र
ReplyDeleteप्रतीकों के माध्यम से ऊर्जा और चेतना को अभिव्यक्त किया गया है।
ReplyDeleteरंगों और रेखाओं का संयोजन कलाकृतियों को विशिष्ट सौंदर्य प्रदान करता है।
यह प्रदर्शनी भारतीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को समझने का अवसर प्रदान करती है।
समग्र रूप से यह कला, साधना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली संगम है।