देशभर के 50 सृजनकारों की चित्राभिव्यक्ति की सार्थक प्रदर्शनी का समापन : संदीप सुमहेन्द्र
जयपुर शहर की प्रतिष्ठित कला दीर्घा में Pelete-D1 आर्ट गैलरी द्वारा आयोजित देशभर के चयनित सृजनकर्ताओं के चित्रों, शिल्पकला और फोटोग्राफी में सृजित कलात्मक अभिव्यक्ति को दर्शाने के लिए तीन दिवसीय सामूहिक कला प्रदर्शनी 17 अगस्त, 2026 को सम्पन्न हुई।
अपने विचारों की रेखांकित और भावपूर्ण चित्रण में अपनी चित्रण शैली, रंगों को नई प्रयोगात्मक तकनीक से कैनवास, कागज के साथ साथ मिट्टी और पत्थर में उकेर कर चित्र, शिल्प एवं कैमरे के द्वारा सृजित कर प्रदर्शित किये है।
इस प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन वैदिक चित्रकार श्री रामू रामदेव ने किया, रामू रामदेव ने कहा कि इस सकारात्मक प्रदर्शनी का अवलोकन करना मेरे लिए अत्यंत सुखद एवं प्रेरणादायी अनुभव रहा। राजा रामचंद्राचारी जी के साथ हमने इस सुंदर प्रदर्शनी का अवलोकन किया। जिसमें नवांकुर कलाकारों के साथ-साथ वरिष्ठ कलाकारों एवं फोटोग्राफर्स ने भी अपनी-अपनी प्रतिभा, संवेदना और सृजनात्मक क्षमता के अनुरूप उत्कृष्ट कलाकृतियाँ प्रस्तुत कीं। प्रत्येक कलाकार की अपनी अभिव्यक्ति और दृष्टि सराहनीय है तथा सभी प्रतिभागी प्रशंसा के पात्र हैं।
मैं पलेट बाय डी-1 आर्ट गैलरी के समस्त प्रबंधन एवं आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं साधुवाद देता हूँ, जिन्होंने कलाकारों को एक सुंदर और सशक्त मंच प्रदान किया। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति को समाज और जन-जन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। कला, कलाकार और समाज के बीच संवाद स्थापित करने की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है। इस सुंदर एवं सार्थक आयोजन के लिए सभी कलाकारों, फोटोग्राफर्स, आयोजकों तथा सहयोगियों को हार्दिक बधाई, धन्यवाद एवं साधुवाद।
इस प्रदर्शनी में 400 में से चयनित हुए 50 सृजनकारों में कुछ से उनके सृजनात्मक अभिव्यक्ति पर हुई वार्ता से मैं इन चित्रकारों के मन को पढ़ने का प्रयास किया कि वर्तमान के इन चित्रकारों को किस तरह अपने विषयों का चयन करते है।
इस क्रम में सर्व प्रथम जयपुर की चित्रकार एवं प्रदर्शनी की संचालक, मोनिका देवी ने भी अपनी पेंटिंग प्रदर्शित की है जिसका साइज 2x2 फीट और शीर्षक: "नीला पात्र–स्वप्निल संसार" है।
मोनिका ने बताया कि मेरी कृति एक साधारण स्थिर-चित्र को रंगों, संतुलन और सौम्य सौंदर्य की भावपूर्ण अभिव्यक्ति में परिवर्तित करती है। गहरे नीले रंग का पात्र इस रचना का केंद्र है, जिसके साथ खिले हुए सफेद फूल पवित्रता, ताजगी और सामंजस्य का एहसास कराते हैं। पृष्ठभूमि में हरे, नीले, गुलाबी और मिट्टी के रंगों की परतें एक स्वप्निल वातावरण रचती हैं, जहाँ रंग केवल दृश्य तत्व नहीं रहते, बल्कि भावनाओं का रूप ले लेते हैं। पात्र की स्पष्ट ज्यामितीय आकृति और फूलों की कोमल प्राकृतिक संरचना के बीच का विरोधाभास स्थिरता और प्रकृति के सुंदर संतुलन को दर्शाता है।
इस कृति के माध्यम से मैंने रोज़मर्रा की साधारण वस्तुओं में छिपी काव्यात्मक सुंदरता को देख कर चित्रित करने का प्रयास किया है। फूलों और पात्र की यह सरल-सी संरचना शांति, प्रसन्नता और जीवन की सूक्ष्म सुंदरता का अनुभव कराती है।
जयपुर की चित्रकार अमृता सगदेव के आकर्षक चित्र शीर्षक "भूरसिंह-कान्हा नेशनल पार्क का हिरण है। जिसका साइज़ 1×1.5 फ़ीट और मीडियम-हैंडमेड पेपर पर ऐक्रेलिक रंगों से चित्रित है। अमृता ने बताया कि मेरी यह कलाकृति गोंड आदिवासी पेंटिंग परंपराओं से काफ़ी प्रेरित है, खासकर इसके बारीक पैटर्न, विशेष तरह से बनाए गए जानवरों, प्राकृतिक आकृतियों और लयबद्ध सजावटी रेखाओं में। हिरण को सौम्यता, सामंजस्य, शालीनता और प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहने का प्रतीक माना जा सकता है। यह पेंटिंग "प्रकृति एक जीवित समुदाय के रूप में" का एक सुंदर संदेश देती है—जहाँ जानवर, पक्षी, पेड़ और इंसान आपस में जुड़े हुए हैं और सभी को एक साथ फलने-फूलने का अधिकार है। यह भारत की समृद्ध आदिवासी कला विरासत का जश्न मनाती है और साथ ही वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी उजागर करती है।
अहमदाबाद की चित्रकार मोहिनी ने जो चित्र बनाया उसका शीर्षक: "सूर्य-सोम-अग्नि-लोचन" है। मोहिनी ने कागज़ पर पेन और ऐक्रेलिक रंगो से यह चित्र सृजित किया है, इस कलाकृति में सूर्य के भीतर चंद्रमा, अग्नि और आँखें शामिल हैं। यह शिव के 1008 नामों में से एक है। शिव 'पुरुष' हैं और बाकी तत्व 'प्रकृति' यानी माँ शक्ति हैं।
जयपुर की चित्रकार पूजा पूरी द्वारा चित्रित 3x4 के कैनवास पर बने चित्र का शीर्षक: "भीतरी गूंज" अपने चित्र के बारे में बात करते हुए पूजा ने कहा कि कभी ऐसा लगता है कि हमारे भीतर कुछ है, जो शांत नहीं होता। चारों ओर की हलचल धीरे-धीरे भीतर उतरती है, और एक अनकही गूंज बन जाती है। दरारों में छिपे भाव, सिकुड़न में सिमटी प्रतिक्रियाएँ सब कुछ दिखाई नहीं देता, पर महसूस ज़रूर होता है।
मेरी बर्निंग कला में सतह को जलाना केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भीतर संचित भावनाओं को समझने का एक माध्यम है। जो अनकहा रह जाता है दर्द, क्रोध, या स्मृतियों की परतें वे आग के स्पर्श से उभरती हैं, जहाँ विनाश नहीं, एक संतुलन जन्म लेता है। जली हुई रेखाएँ मिटती नहीं, वे ठहर जाती हैं ठीक वैसे ही जैसे कुछ एहसास हमारे भीतर हमेशा के लिए बस जाते हैं।
उनकी गहराई में छिपी हैं अनुभवों की परतें, और उनके बीच बहते रंग उनसे जुड़ी भावनाओं की धीमी आवाज़ हैं। मेरा यह चित्र आग, स्मृति और भावना के बीच चल रहे एक संवाद के अंश का चित्रण है।
जयपुर की चित्रकार कविता उपाध्याय के चित्र का शीर्षक: "धरोहर" है। कविता ने बताया कि उन्हें बचपन से ही प्रकृति और चित्रकला से बहुत प्रेम रहा है। मैं प्रकृति से जुड़ी अनुभूतियों और उसके विभिन्न रूपों को अपने विचारों को चित्रकला के माध्यम से अभिव्यक्त करती हूँ। तो मैं स्वयं को प्रकृति के और अधिक निकट महसूस करती हूँ। कुछ समय पहले मैंने पलेट डी-1 आर्ट गैलरी से जुड़ी। शुरुआत में मैंने वहाँ अपनी कुछ चित्रकृतियाँ प्रदर्शित कीं, जिन्हें दर्शकों से बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला। इस प्रदर्शनी के माध्यम से मुझे अनेक कलाकारों के साथ कार्य करने और अपनी कला को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला। पलेट डी-1 आर्ट गैलरी के सहयोग और मार्गदर्शन से मेरी चित्रकृतियों को कला-प्रेमियों का स्नेह और सराहना प्राप्त हुई। मेरी कुछ चित्रकृतियों को कला-प्रेमियों ने अपने संग्रह का हिस्सा बनाया, जो मेरे लिए एक कलाकार के रूप में अत्यंत सुखद और प्रोत्साहन देने वाला अनुभव रहा। इससे मुझे अपनी कला को और अधिक निखारने तथा निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
15 अगस्त के शुभ अवसर पर इस गैलरी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी में मैंने भी भाग लिया, जिसमें मेरी तीन चित्रकृतियाँ प्रदर्शित की गईं। विशेष रूप से वर्षा के बाद प्रकृति में आए बदलावों और उसकी मनमोहक सुंदरता को मैंने अपनी चित्रकृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। प्रकृति और उसकी सहज सुंदरता मेरे लिए सदैव प्रेरणा का प्रमुख स्रोत रही है।
मुंबई के चित्रकार सुहास अर्जुन मांजरेकर के चित्र 18x 25 इंच का है जिसका शीर्षक : द जॉय ऑफ़ क्रिएशन एवं चित्र को ऑयल में कैनवास पर चित्रित किया गया। मैंने अपने चित्र में “द जॉय ऑफ़ क्रिएशन” बचपन की मासूमियत को दिखाता है, जहाँ कल्पना रंगों और रचनात्मकता के ज़रिए आज़ादी से बहती है। ड्राइंग में डूबा हुआ शांत बच्चा बिना किसी सीमा के कुछ नया बनाने की सादी खुशी को दर्शाता है। कलाकार का सफ़र क्रेयॉन से शुरू हुआ, जहाँ कल्पना के पहले स्ट्रोक्स ने आकार लिया।
डॉ. शकुंतला महावर भी जयपुर की ही चित्रकार है। इनके चित्र का शीर्षक: "मेरा शहर" है। उन्होंने बताया कि मेरी कलाकृति के माध्यम से हमारे विश्व प्रसिद्ध जयपुर शहर के गौरवशाली व प्राचीन खगोल विज्ञान के कौशल "जंतर मंतर" को मैंने चित्रित कर दर्शाने का प्रयास किया है। यह जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा बनाया गया, जो समय वह इतिहास को दर्शाता है
इसकी शैली आधुनिक है। लाल, भूरा, नारंगी, गहरा पीला, मिट्टी के रंगों का प्रयोग कर इसे प्राचीन व ऐतिहासिक स्वरूप देने का प्रयास किया है यह रंग शहर की जीवंतता, ऊर्जा और गर्म जोशी को व्यक्त करते हैं। धुंधले काले, गहरे रंगों का उपयोग कर गहराई और रहस्यमय वातावरण पैदा करते हैं। जो इसकी ऐतिहासिक खूबसूरती को और अधिक निखारते हैं।
जयपुर के चित्रकार धीरज खंडेलवाल ने ऑयल में अपना चित्र बनाया है जिसका शीर्षक: "संगीत" है। धीरज अपनी चित्र में यह बताना चाहते है कि "संगीत" इस एक शब्द में धरती से लेकर आसमां तक सबकुछ समाया हुआ है। जो इसमें रम गया वो सम गया, ईश्वरीय अनुभूति को प्राप्त हो गया। वो सब के बीच होकर भी किसी का न रहा और सब का हो गया। विचित्र है ये अनुभूति जो आपको महसूस होती है आपके हृदय में धड़कती है और उसकी गूंज सर्वत्र फैलती है।
दिल्ली के चित्रकार प्रसून पोद्दार ने अपने चित्र के बारे में बताया कि मेरी कला मेरे अंदर की दुनिया और समाज के बारे में मेरे नज़रिए दोनों को दिखाती है। इंसानी आकृतियों, हरकत, बनावट और रंगों के ज़रिए मैं भावनाओं, सपनों और रोज़मर्रा के अनुभवों को समझने और दिखाने की कोशिश करता हूँ। मेरा काम खुशी और दुख के एक साथ होने को दिखाता है और एक ऐसी विज़ुअल भाषा बनाता है जो निजी, शांत और पूरी तरह से मानवीय है।
पुणे के चित्रकार एस.जे. तायडे की 36x 20 के कैनवास पर ऑयल रंगों से चित्रित किया है उसका शीर्षक: क्रिमसन डिवोशन (गहरी श्रद्धा) है। तायड़े ने बताया कि यह एक प्रभावशाली पोर्ट्रेट है जो श्रद्धा, पहचान और आंतरिक शक्ति को दर्शाता है। इसे बोल्ड ब्रशवर्क, बिखरे हुए आकारों और गहरी भावपूर्ण आँखों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। इसमें इस्तेमाल किए गए अलग-अलग तरह के रंग भावनात्मक गहराई और शांत आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास कराते हैं।
बांसवाड़ा, राजस्थान के चित्रकार सुमित त्रिवेदी के 24x24 इंच के चित्र का शीर्षक: 64-योगिनी-01 है। सुमित ने बताया कि मेरी कलाकृति महामाया को दर्शाती है, जो पूरी दुनिया को चलाने वाली शक्ति हैं। इसमें मैंने अपने सरियलिस्ट (अवास्तविक) स्टाइल के ज़रिए रचना और विनाश को दर्शाया है।
कलावृत्त संस्था की और से सभी चित्रकारों के उज्वल भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ।
धन्यवाद
संदीप सुमहेन्द्र
चित्रकार एवं कला समीक्षक













Honoured and grateful to see our exhibition featured. Thank you for beautifully highlighting the artistic journey and creative expressions of artists from across India. 🙏🙏
ReplyDeleteकलावृती की पूरी टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ एवं हार्दिक धन्यवाद। 🌸
ReplyDeleteकलाकारों के लिए इस तरह का लेखन बहुत महत्वपूर्ण है। यह कलाकार और समाज के बीच एक सुंदर संवाद स्थापित करता है और समाज को कलाकार तथा उसकी कला को पहचानने और समझने का एक माध्यम प्रदान करता है। ऐसे मंचों के माध्यम से कलाकृति के पीछे छिपे भाव और विचारों को समझना और भी सहज हो जाता है।
इस सुंदर पहल के लिए कलावृती की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद।